Category Nivesh Patrika

बाजार से सच्ची दोस्ती रखे

बाजार से सच्ची दोस्ती रखे

मंदी कल में बाज़ार से मुँह नहीं मोड़े

यह है दोस्ती कि दास्तां –

यह एक सामान्य सी अवधारणा है कि जब किसी वयक्ति के दिन खराब होते है या उस पर विपत्तियों के साये मंडरा रहे होते है, तो लोग धीरे धीरे उससे कटने लगते है, यहाँ तक कि आपातकाल में जब उसे ज्यादा सहयोग कि जरुरत होती है, तो आमतौर  पर साथ रहने वाले मित्र भी दूरी  बनाने लग जाते है, लेकिन ऐसे लोग न तो ' सच्चा दोस्त ' कहलाने का हक़ रखते है और न ही यह सच्ची दोस्ती निभाने कि परिभाषा में आते है बाज़ार पर भी यह सोच लागु होती है |...

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